motivational story in hindi

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ये कहानी आपको सक्सेसफुल बना सकती है Motivational story in hindi

मुसीबते हमारी ज़िंदगी की एक कटु सच्चाई है इस दुनिया में ऐसा कोई भी इंसान नहीं होगा जिसने अपनी जिंदगी मुसीबत का सामना नहीं किया होगा Motivational story in hindi

हम सभी के जीवन में कभी ना समस्या आती है या बड़ी तकलीफ आती है पर सवाल यह है के आपको बिखरना है या निखारना है ये आपकी Attitude सोच पर निर्भर करता है समस्या किसी-किसी को निखार देता है किसी-किसी बिखर देता है

ये कहानी में भी एक लकड़हारा अपनी जिंदगी का तम्मान मुसीबतो का सामना करते हुए कैसे निखार गया आपको पता चलेगा दोस्तों अगर आपके जिंदगी में भी आप समस्या का सामान कर रहे है चाहे समस्या किसी भी प्रकार का है तो ये पोस्ट आपके लिए

ये Motivational story in hindi कहानी बहुत बेहतरीन है जो आपकी जिंदगी बदल सकता है ! इस कहानी पूरा पड़े कही भी कोई भी कुछ स्किप किये बिना

ये कहानी आपको सक्सेसफुल बना सकती है Motivational story in hindi

हमने सुना था

एक लकड़हारा था वो लकड़ियाँ काटता था उसी जंगल में एक संत भी था वो तपस्या करते थे साधना करते थे वो ऐसे 20 साल से चला आ रहा था रोज लकड़हारा जाता लड़किया काटता और संत अपने तपस्या में लीन रहते

पर एक दिन अचानक अचानक कुछ अजीब सा हुआ

संत ने अपनी आंखें खोली और आशीर्वाद की मुद्रा में काहा आगे जाओ लकड़हारा चकित हो गया 20 में कभी संत ने अपने आंखे नई खोला था और ना ही एक शब्द कहा था लकड़हारा तुरंत संत के पास गया और काहा महाशय अपने अभी किया कहा था पर उस संत ने तुरंत अपने आंखे बंद कर ली फिर वो ध्यान में लीन हो गया !

लेकिन लकड़हारे ने बार बार पूछा आपने कुछ काहा है मुझे बताइये आपने किया कहाँ पर संत ने उत्तर नहीं दिया ! तो लकड़हारा चला और लड़किया काटकर उसे बेच कर अपना घर आ गया

लेकिन उस लकड़हारे को नींद नहीं आयी रात भर यही सोचता था? की 20 साल में संत ने कभी कुछ कहा नहीं और अचानक पहली बार कुछ काहा वो शब्द यु ही तो नहीं हो सकते है ! पर इसका किया अर्थ हुआ आगे जाओ उसने सोचा मैं अनपढ़ अज्ञानी में किया जानू आगे जाने का अर्थ में सिर्फ इतना समझता हु की आगे चलू और चलना ही होता है में कोई दर्शन ज्ञान तो समझता नहीं !

सफलता के लिए उठाना पड़ेगा रिस्क motivational story in hindi

अगले दिन उसने निर्धारित किया वो जीवन में पहली बार रिस्क लेगा लकडिया नहीं काटने का उसको पता था अगर लकडिया नहीं कटी तो घर में चूल्हा नहीं जलेगा और आज शायद खाना भी ना मिले

उसने रिस्क लिया क्योकि आज उसको साधु ने कहा था आगे जाओ साधु के आशीर्वाद ले के कुछ कदम आगे चला जिंदगी में पहली बार उन्होंने उस दिन लकड़ी नहीं काटी इसलिए 5-7 किलोमीटर आगे जाने के बाद वाहा जो उसने देखा तो पहले जोर-जोर से हँसा फिर जोर जोर से हँसा पागलो की तरह फिर छाती पिट पिट के जोर-जोर से रोया बिलख-बिलख के रोया

क्योकि 7 किलोमीटर आगे जाकर उनसे देखा वाहा चन्दन के जंगल थे इसलिए उन्होंने जोर-जोर से हँसा अब चन्दन बेचेगा जिंदगी खूबसूरत हो जाएगी कई गुना ज्यादा उसको पैसा मिलेगा इसलिए जोर-जोर से हँसा फिर छाती पिट-पिट कर इसलिए रोया की संत 20 साल पहले ही कह देते

थोड़ा आगे चले जाओ झक मार रहे थे किया 20 साल से काश पहले ही कह देते थोड़ा सा आगे चले जाओ इतने साल जीवन के बरबाद नहीं जाता

फिर उसने तुरंत चन्दन काटा और जा कर तुरन्त चन्दन बेचा और उसको कई गुना पैसा मिला संत के पैरो में लोट-पोत हो गया धन्यवाद दिया उसको फूलो से तौल दिया संत को उसके सामने फल रख दिए पर संत आंखे खोलने का तैयार नहीं उसी ध्यान में संत बैठे रहे

अब वो एक संभ्रांत व्यक्ति में गिनती होती थी उस लकड़हारे की जाता और चन्दन काट कर ले आता पर एक रात उसको फिर से नींद नहीं आयी उसके दिमांग मै वही प्रश्न बार बार गूंज रहा था की आज भी संत का अंतिम शब्द यही है! आगे जाओ कोई तो बात है ! उसके बाद फिर संत कभी आंखे ना खोली और ना ही कुछ कहा भी

फिर उसने निर्धारत किया की अब कल लकडिया नहीं काटेंगे उसने अपने उस दिन के लालच पर नियत्रण किया उसने उस दिन के अपने कमाई भी छोड़ी और कुछ किलोमीटर आगे गया और कुछ किलोमीटर आगे जाने पर अब जब उसने देखा तो ना तो हस सका और ना ही वो रो सका अवाक् रह गया !

(कहते है भगवान् बुध को जब बुधतत्व का प्राप्ति हुयी थी तो अवाक् रह गए थे इंद्रा आदि देवताओ ने आके इस्तुति कही थी और कहा था प्रभु कुछ तो बोलिये सदियों में कोई एक व्यक्ति बुध होते है और वो भी चुप रह गया तो कैसे चलेगा)

तो इस तरह से वो व्यक्ति अवाक् रह गया क्योकि उसने देखा 7 किलोमीटर आगे वाहा चांदी की खदाने था वो चकित रह गया !

इससे पहले की वो कुल्हाड़ी उठा के चाँदी काटता उसके दिमाग में बात समझ में आयी की शायद साधु कुछ गहरा कह रहा था अब उसके हाथ मानो कोई सूत्र लगा हो !

वाहा वो चाँदी काटने रुका नहीं वो और आगे चला गया और उसने कुछ किलोमीटर और आगे जाकर उसने देखा जैसा उसने सोच था वाहा सोने की खदान था! और वो कुल्हाही के ले सोना काटने के लिए नहीं रुका

वो और कुछ किलोमीटर आगे बढ़ा और कुछ किलोमीटर आगे जाकर देखा उसने वाहा हिरे की खदाने थी जैसा उसे पता था जैसे उसको जानकारी था और दोस्तों वो कुल्हाड़ी लेकर उसने हिरा काटने भी नहीं रुका और वो आगे बड़ा जैसे उसे समझ में आ रहा था!

साधु किया कह रहा था वो लगातार चलता गया और चलते चलते उसकी ज़िन्दगी में वो मुकाम आया की वो स्वयं हिरा बन गया !

और आज दुनिय उसे स्वामी विवेकानद के नाम से जानती है सुभाषचंद्र बॉस के नाम से जानती है भगतसिंह के नाम से जानती है बाबासाहेब अम्बेडर के नाम से जानती है!

दोस्तों ये कौन हैं ये लोग ये वही लोग है जो कभी रुके नहीं ये भी चन्दन काट सकते थे जब स्वामी विवेकानंद जी को जब ऑफर मिला था Harvard विश्वविधालय से की आप प्रोफ़ेसर के चेयर लीजिये वो भी तो उस मलमलके गड्डो पे सो सकते थे! वो अपने देश के सेवा के लिए लौट गया उन्हें चन्दन नहीं कटाना था !

जब बाबासाहब अम्बेडर को जब लंदन से इतनी पढ़ाई करके आये थे तो भी उन्होंने दलितों के लिए लड़ाई लड़ी उन्होंने अपने जीवन को स्वयं के लिए सिमित नहीं किया चांदी नहीं काटी अपने ज़िन्दगी में

और लगातार ये लोग आगे बढ़ते रह गए संस्कृत में एक शब्द आता है दोस्तों चारावेति-चारावेति चलते चलते रहो पर कुछ लोग इसका गलत मतलब समझते है उसको लगता है चरते रहो चरते रहो जीवन चरना नहीं है!

जीवन लगातार चलना है अपने आज को अपने कल से लगातार बेहतर करना है जीवन है दोस्तों Martin Luther King कहते थे दौड़ो अगर तुम दौड़ सको तो और यदि तुम दौड़ नहीं सके तो कम से कम चलो और यदि तुम चल भी नहीं सकते तो काम से रेंगो पर रुके मत लगातार चलते रहे

दोंस्तो में उम्मींद करता हु , कहानी आपको समझ में आ गया होगा । इस कहानी से आपको क्या सीख मिली । कृपया कमेंट करके जरूर बताये और इसे अपने दोंस्तो को शेयर करना ना भूले motivational story in hindi

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